नई दिल्ली, 23 दिसंबर
आज पूरे देश में राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर मनाया जाता है, जिन्होंने किसानों के हितों के लिए जीवनभर संघर्ष किया और कृषि क्षेत्र में अहम योगदान दिया।
किसानों के योगदान को मान्यता
भारत एक कृषि प्रधान देश है, और यहां की लगभग 60% जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। किसानों के अथक परिश्रम और समर्पण के कारण ही देश खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भर बना हुआ है। राष्ट्रीय किसान दिवस का उद्देश्य किसानों के योगदान को पहचानना और उनके अधिकारों और कल्याण के प्रति जागरूकता फैलाना है।
चौधरी चरण सिंह का योगदान
चौधरी चरण सिंह ने अपने कार्यकाल में कृषि सुधारों और किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण नीतियां बनाई। उन्होंने छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों के लिए ऋण और आर्थिक सहायता के प्रावधानों को सुदृढ़ किया। उनके विचार और नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं और भारतीय कृषि क्षेत्र को प्रेरित करती हैं।
देशभर में आयोजनों की धूम
राष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सेमिनार, वर्कशॉप, और किसान मेलों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को कृषि के महत्व और किसानों के योगदान के बारे में शिक्षित किया जा रहा है।
सरकार की योजनाएं और चुनौतियां
कृषि क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं, जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, और कृषि उपकरण सब्सिडी। हालांकि, किसानों को बदलते जलवायु, बाजार की अनिश्चितता, और लागत में बढ़ोतरी जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
आशा और संकल्प
राष्ट्रीय किसान दिवस हमें याद दिलाता है कि किसानों का सम्मान और उनकी समस्याओं का समाधान हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। यह दिन हमें उनके लिए अधिक समर्पण और सहयोग के साथ काम करने की प्रेरणा देता है।
आओ, किसानों का साथ दें
राष्ट्रीय किसान दिवस पर, हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम किसानों की मेहनत का सम्मान करेंगे और उनके जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास में भागीदार बनेंगे।
जयहिंद, जय किसान!


