बालको के 10 मंजिला अपार्टमेंट पर उठने लगे सवाल, अफसरों ने दिल खोलकर “वरदान अपार्टमेंट” को दिया वरदान

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कोरबा जिले में बालको प्रबंधन बिलासपुर संभाग का सबसे ऊंचा 10 मंजिला आवासीय अपार्टमेंट बना रहा है। कोरबा के इतिहास में ऐसा ये पहला मामला है, जिसमें किसी संस्थान को 10 मंजिला इमारत बनाने की अनुमति सरकारी विभागोें से दी गयी हो। औद्योगिक जिला कोरबा की बात करे, तो यहां कोल माइनिंग एरिया होने का हवाला दे कर पहले कभी भी आवासीय,व्यवसायिक या शासकीय भवन को ग्राउंड फ्लोर प्लस चार मंजिल से अधिक के निर्माण अनुमति नही दी गयी। ऐसे में बालको प्रबंधन को लोकसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच महज 2 महीने में मिले 10 मंजिला इमारत के परमिशन को लेकर सरकारी विभाग भी सवालों के घेरे में है।

वेदांता समूह की भारत एल्यूमिनिम कम्पनी लिमिटेड एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल इस बार बालको प्रबंधन ने सरकारी विभागों से ऐसी परमिशन लेने में सफलता हासिल कर ली है, जिसे जानने के बाद बिल्डर और डेव्लपर्स सहित राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल पूरा मामला बालको के जीईटी हाॅस्टल के पीछे बन रहे “वरदान अपार्टमेंट” से जुड़ा हुआ है। पूरे बिलासपुर संभाग में बालको प्रबंधन द्वारा कोरबा में ग्राउंड फ्लोर प्लस 9 मंजिल का अपार्टमेंट बनवा रही है। जिसका निर्माण कार्य राजस्थान की कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। इस 10 मंजिला इमारत के लिए बकायदा कोरबा नगर निगम सहित शहर तथा ग्राम निवेश विभाग के अधिकारियों ने परमिशन देने में जमकर दरियादिली दिखाई है।

लोकसभा चुनाव के दौरान दिया परमिशन,सवालों के घेरे में जवाबदार अफसर

बालको को मिले परमिशन के दस्तावेजों पर गौर करे, तो पता चलता है कि वेदांता समूह की भारत एल्यूमिनिम कम्पनी लिमिटेड ने नगर तथा ग्राम निवेश कार्यायल कोरबा के उप संचालक को इस भवन निर्माण की अनुमति के लिए 11 मार्च 2024 को आवेदन दिया गया। आपको बता दे इसी बीच 18 मार्च से प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लग गयी थी। इस पूरे प्रकरण में खास बात यही है कि एक तरफ जहां लोकसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच सरकारी दफ्तरों में चुनावी व्यस्तता के कारण सारे कामकाज की रफ्तार धीमी हो गयी थी। वहीं कोरबा के नगर तथा ग्राम निवेश सहित अन्य विभागोें ने इस परमिशन को देने के लिए काफी तेजी दिखाई। महज दो महीने के भीतर ही 13 मई 2024 को बालको को अनुमति दे दी गयी।

बालको के ठीक बगल में रजगामार कोल माइंस फिर भी दिया परमिशन !

कोरबा में बालको प्रबंधन को मिले इस अपार्टमेंट के परिमिशन को लेकर जब जवाबदार अधिकारियों से जानकारी चाही गयी, तो उनकी सांसे अटकने लगी। आपको बता दे कि आज से पहले तक किसी भी भू-स्वामी या फिर बिल्डर को इतनी उंची इमारत की अनुमति नही दी गयी। नगर निगम सहित अन्य विभागों से मिलने वाली अनापत्ति में जिले में संचालित एसईसीएल की कोयला खदानों का हवाला देकर परमिशन नही दिया गया। लेकिन बालको के ठीक बगल में एसईसीएल की रजगामार भूमिगत खदान संचालित है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि इन सारे नियमों के बावजूद बालको पर यह नियम क्यों लागू नही किया गया? आरोप तो ये भी लग रहे है कि बालको को मिले इस परमिशन के बाद वे सारे विभाग सवालों के घेरे में है, जिन्होने इस 10 मंजिला अपार्टमेंट निर्माण के लिए बिना जांच के ही अपनी अनापत्ति दी। अब इस पूरे मामले पर बालको से लेकर जवाबदार विभाग के अफसर कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे है।

डेढ़ लाख वर्गफूट के प्लॉट पर अपार्टमेंट का किया जा रहा निर्माण

बालको के इस निर्माणाधी अपार्टमेंट को लेकर संबंधित अधिकारी कुछ भी बोलने से भले ही बच रहे हो। लेकिन इस परमिशन से संबंधित जो भी दस्तावेज हाथ लगे है, उससे पता चलता ह कि निर्माणाधी अपार्टमेंट ग्राम रिसदा के 14 अलग अलग हलकों के हिस्से को मिला कर बताये गये डेढ़ लाख वर्गफूट के भूखंड पर बनाया जा रहा है। जो कि मौजूदा जीईटी हॉस्टल के ठीक पीछे और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास स्थित है। बताया तो ये भी जा रहा है कि अपार्टमेंट निर्माण से ठीक पहले यहां पर लगे सालों पुराने पेड़ो की अंधाधुन कटाई की गयी। उस वक्त भी इस मामले की जानकारी बालको के रेंजर जयंत सरकार से जाननी चाही गयी थी। लेकिन रेंजर ने पेड़ कटाई के इस पूरे मामले पर जांच के नाम पर कभी भी संतोषजनक जवाब नही दिया गया। जिससे अब इस पूरे प्रकरण को लेकर वन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

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