दंतेवाड़ा– बस्तर की धरती एक बार फिर अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय जीवनशैली के अद्भुत प्रदर्शन का गवाह बनी। श्बस्तर पंडूम 2025श् के अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दंतेवाड़ा के हाई स्कूल मैदान में आयोजित इस भव्य संभाग स्तरीय कार्यक्रम में शिरकत की और जनजातीय विरासत की सराहना करते हुए विभिन्न जिलों के स्टॉलों का अवलोकन किया।
कार्यक्रम में बस्तर संभाग के सातों जिलों कृ दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, जगदलपुर और कांकेर कृ के जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में चयनित प्रतिभागियों द्वारा पारंपरिक व्यंजनों, पेय पदार्थों, स्थानीय साग-सब्जियों और वनोत्पादों की प्रस्तुति की गई। इस आयोजन का उद्देश्य बस्तर की जनजातीय समृद्ध संस्कृति और परंपरा को राष्ट्रीय और वैश्विक पटल पर लाना और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देना है।
अमित शाह ने की जनजातीय व्यंजनों की सराहना :
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न केवल व्यंजनों और उत्पादों को निहारा, बल्कि स्थानीय लोगों से आत्मीय संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति, खानपान और जीवनशैली देश की अनमोल धरोहर है, जिसे देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने जनजातीय समाज के योगदान की सराहना करते हुए उनकी परंपराओं को संरक्षित रखने पर बल दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी रहे मौजूद :
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे। उन्होंने अमित शाह को विभिन्न व्यंजनों की जानकारी दी और बस्तर की सांस्कृतिक विविधता को विस्तार से अवगत कराया।
हर जिले की खास पेशकश :
सुकमा जिले के स्टॉल में केकड़ा चटनी, बेसुका चटनी, बोदय चटनी, झिमा मिनी चखना, नुगुर राबा, चावा (पेज), पूली मेल, लंदा, सेल्फी जैसी अनूठी पारंपरिक चीजें प्रस्तुत की गईं।
दंतेवाड़ा में जाटा जावा, जुड़क जावा, दूसा जावा, कोहला जावा जैसे पारंपरिक पेय पदार्थ आकर्षण का केंद्र रहे।
जगदलपुर ने सल्फी, छिंद रस, सुराम, चाऊर भाजा, तिखुर पालो, भेंड़ा टोप शरबत, नीम फुल सब्जी आदि व्यंजनों से लोगों का मन मोह लिया।
कोंडागांव में मरा गोरगा (सल्फी), दाड़गो (देशी दारू), तिखुर शरबत जैसी परंपरागत पेय प्रस्तुत किए गए।
बीजापुर के स्टॉल में मडि़या पेज, बेल शरबत, जिर्रा शरबत जैसी ठंडी पेय सामग्री का प्रदर्शन किया गया।
नारायणपुर ने कोडिल कुसीर, मांट कुसीर, गोरगा सल्फी जैसे खास व्यंजन प्रस्तुत किए।
कांकेर में टेठरी, बोबरा रोटी, अरसा, खुरमी जैसे पारंपरिक मिठाइयों और व्यंजनों की प्रदर्शनी लोगों को खूब पसंद आई।
संस्कृति और स्वाद का अद्भुत संगम :
‘बस्तर पंडूम 2025’ न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव है बल्कि यह जनजातीय समुदाय के जीवन, स्वाद और पहचान का उत्सव भी रहा। यह आयोजन बस्तर की जीवंत विरासत का प्रतीक बनकर उभरा, जिसने साबित किया कि जनजातीय परंपराएं आज भी प्रासंगिक, समृद्ध और सबको गौरवान्वित करती है।