डैम में भालू की लाश मिलने से इलाके में दहशत…

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बालोद- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में तांदुला बांध में एक भालू की संदिग्ध हालत में मौत के बाद पंचनामा और पोस्टमार्टम के बगैर शव के गायब होने का मामला सामने आया है। दरअसल, बांध में मछली पालन कार्य की मॉनिटरिंग करने वाले चौकीदारों को फरवरी के अंतिम सप्ताह में बांध में भालू का शव मिला था। जिसे वन विभाग को सौंप दिया गया था।

लेकिन इसके बाद क्या हुआ, यह किसी को मालूम नहीं है। शव को वन विभाग को सौंपने वाले चौकीदारों का दावा है कि भालू की मौत की जानकारी मिलने के बाद तत्काल विभाग को जानकारी दी थी। जिसके बाद विभाग की टीम पहुंचकर शव को अपने साथ ले गई। लेकिन अब वन विभाग के अफसर से लेकर कर्मचारी इस मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।

वन विभाग से लेकर पशु चिकित्सा विभाग के रिकॉर्ड में भालू की मौत का कोई जिक्र नहीं है। दावा किया जा रहा है कि इस साल एक भी भालू की मौत नहीं हुई है। खुद अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जिले में किसी भालू की मौत हुई ही नहीं है।

जबकि भास्कर के पास भालू के शव की तस्वीरें, वीडियो और उन लोगों के बयान मौजूद हैं, जिन्होंने सबसे पहले शव को देखा और वन विभाग को सूचना दी थी। किसी भी वन्य प्राणी यानी जंगली जानवर की मौत के बाद उसका पूरा रिकॉर्ड बनाना अनिवार्य होता है। नियम के अनुसार रेंजर कार्यालय से अनुविभागीय अधिकारी (वन) को आधिकारिक पत्र भेजा जाता है।

जिसके बाद पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंचकर पोस्टमार्टम करती है। इस प्रक्रिया के दौरान वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाती है, ताकि मामले में पारदर्शिता बनी रहे। इसके बाद निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत शव का दाह संस्कार किया जाता है।

सरकार इस पूरी प्रक्रिया के लिए विभाग के माध्यम से अलग से फंड जारी कर जरूरी इंतजाम भी करती है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो लेकिन भालू की संदिग्ध परिस्थिति में मौत के मामले में इन सभी नियमों की अनदेखी कर शव को गुपचुप तरीके से गायब कर देना संदेहास्पद है।

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