केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को विपक्षी दलों के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि नए आपराधिक कानून लागू करने का फैसला लेने से पहले पर्याप्त विचार विमर्श नहीं किया गया। कहा कि भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम के स्थान पर तीन नए आपराधिक कानून- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम कानून एक जुलाई से लागू किए जाएंगे।
मेघवाल तीनों नए कानूनों पर जागरूकता के लिए कानून मंत्रालय द्वारा कोलकाता में भारत की नई आपराधिक न्याय प्रणाली- एक प्रगतिशील कदम विषय पर आयोजित सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समय पर, त्वरित और त्रुटिरहित न्याय प्रदान करने के लिए नए कानून लाए गए हैं।
नए कानूनों के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण कार्यक्रम और बुनियादी ढांचे का विकास पहले से ही जारी है।मेघवाल ने कहा, कुछ लोग दावा करते हैं कि उनसे परामर्श नहीं किया गया, यह गलत है। औपनिवेशिक कानूनों में बदलाव की मांग लंबे समय से चली आ रही है और यह प्रक्रिया बहुत पहले शुरू हो गई थी।
उन्होंने बताया कि सभी राज्यों से सुझाव मांगे गए थे, लेकिन केवल 18 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों ने ही जवाब दिया। भारत के प्रधान न्यायाधीश सहित 16 उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों, पांच विधि अकादमियों और 22 विधि विश्वविद्यालयों ने भी अपने सुझाव दिए।
मेघवाल ने कहा, हमने सभी सांसदों से संपर्क किया, लेकिन दोनों सदनों के केवल 142 सदस्यों ने ही जवाब दिया। देश भर के सभी विधायकों से भी सुझाव मांगे गए, लेकिन केवल 270 ने ही जवाब दिया। हमने व्यापक रूप से परामर्श किया, लेकिन सभी ने जवाब नहीं दिया। ये कानून चार वर्षों के गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार किए गए।